Saturday, 7 May 2011

क्या होगा यदि भ्रष्टाचार नहीं होगा?


कपिल सिब्बल की तरह मैं भी कभी-२ सोचता हूँ और अपने आप से पूछता हूँ कि क्या होगा यदि भ्रष्टाचार नहीं होगा? कपिल सिब्बल जी का तो पता नहीं पर मेरे रोम-२ और मेरी रूह के अंदर से आवाज़ आती है कि अगर भ्रष्टाचार नहीं रहा तो देश क़ी तस्वीर बदल जाएगी| और इतना बदलेगी कि देश क़ी तरक्की क़ी रफ़्तार 8% से 16% पहुँच सकती है, 5 से 10 साल के अन्दर ही भारत दुनिया की 1 नंबर की इकोनोमी बन सकता है, गरीबी इतिहास की बात बन सकती है, सामाजिक बराबरी कल्पना न रह कर असलियत का रूप ले सकती है और राम राज्य की कल्पना को पंख लग सकते हैं और भारत का काया कल्प हो सकता है|  ज़रा गौर कीजिये क्या होगा यदि भारत में भ्रष्टाचार नहीं होगा?

सोचिये अगर पूलिस पैसे नहीं खाए तो क्या होगा? पेशेवर हत्यारे जैसे बड़े अपराधी से लेकर पॉकेटमार सरीखे छोटे छोटे अपराधी भी पहले तो पकडे जायेंगे और फिर पूरी सजा पाएंगे, क्योंकि पुलिस वाले न तो उनको छोड़ने या भगाने के पैसे ले सकेंगे और न ही सबूतों क़ी अनदेखी करने के|  अब आप कभी भी थाने जाइये, और अपनी शिकायत दर्ज करवा आइये, FIR के भी कोई पैसे नहीं लगेंगे|  और यदि आपकी पीड़ा या शिकायत किसी बड़े या बहुत बड़े आदमी के खिलाफ है तो भी डरने क़ी बात नहीं क्योंकि अब पुलिस बड़े आदमी का पक्ष लेने को मजबूर करने वाली कीमत स्वीकार नहीं कर सकती | सड़क पर वाहन चलाते हुए अगर कागज़ पूरे नहीं हैं, तो चालान सभी का कटेगा, चाहे भाई साहब की जान पहचान ऊपर तक हो, जब पैसा नहीं मिलना और न ही कोई पोस्टिंग कमाई वाली रहेगी तो कौन किसकी सिफारिश मानेगा|  इतना ही नहीं, जन लोकपाल बिल पास होने पर सभी सरकारी विभागों को एक "सिटिज़न चार्टर" बनाना होगा, जिसमे ये लिखा होगा कि पब्लिक का फलां काम इतने दिन में होगा, और अमुक इतने दिन में| उदाहरण के तौर पर मोटर बाइक चोरी होने की अर्जी देने पर पुलिस को "इतने" दिनों में सूचना देनी होगी, कि बाइक मिली या नहीं| समय पर सूचना न देने पर जिम्मेवार पुलिसवाले की पगार में से कटकर आपको क्षतिपूर्ति हर्जाना भी मिलेगा, विश्वास मानिये ये सच है, और हो भी क्यों न, हम अपना पेट काट कर जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स के पैसे सरकार को जमा कराते हैं उन्हीं पैसों से तो इनको तनख्वा मिलती है, नौकर हैं ये हमारे| 

एक बार मेरे अप्रवासी भारतीय मित्र ने मुझे बताया कि भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में से 90% आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण होती हैं| आपके साथ कितनी बार ऐसा हुआ है कि सड़क पर वाहन चलाते-२ एक दम से खड्डा आ गया और आपके साथ दुर्घटना होते-२ बची| कितने ऐसे तीव्र मोड़ होंगे जिन पर पहले ही कम दिखाई पड़ता था और अब टिक्की वाले ने पूलिसवाले से सेट्टिंग करके रेहड़ी और लगाली| यहाँ आठ दस दुर्घटनाओं के बाद "दुर्घटना संभावित क्षेत्र" का बोर्ड तो ज़रूर लग जाता है, पर दुर्घटना के कारणों कि जाँच और उसके समाधान कि फुर्सत किसे है| शायद आप जानते ही होंगे कि ऐसा क्यों होता है| जो अफसर सड़क की शुरूआती योजना बनाते हैं, वो किसी के प्लाट छोड़ने के पैसे खा जाते हैं और किसी की ज़मीन में से सड़क निकालने के| मिनिस्टर लोग सड़क बनाने का ठेका सिर्फ उन्ही को देते हैं जो उनकी पेट पूजा कर सके| जिन सरकारी अफसरों को सड़क बनाने वाले ठेकेदारों के काम देखने की जिम्मेवारी दी जाती है, वो ठेकेदारों से पैसे खा जाते हैं| लेकिन अगर जन लोकपाल बिल पास हो गया तो ये सब नहीं चलेगा| आपको सिर्फ एक SMS, या एक ईमेल करनी है या पत्र लिखना है और बताना है कि कहाँ और कैसे घोटाला हो रहा है, बस काम हो गया| आपका नाम गुप्त रखा जायेगा, पैसे खाने वाले जेल में जायेंगे और जितने पैसे खाए सब उगलने पड़ेंगे, नहीं तो घर बार सब नीलम हो जायेगा, पैसे खिलाने वाली कम्पनिओं के मालिक जेल में तो जायेंगे ही साथ में उन्हें सरकारी नुक्सान का पांच गुना पैसा भी वापिस जमा कराना होगा, और आपकी इस जानकारी की वजह से जनता का जो नुकसान बचा है, उसका 10% तक आपको इनाम भी मिलेगा|

अब बात काम धंदे की| आज अगर आपको एक छोटी फैक्ट्री लगानी हो तो सरकार के हिसाब से आपको 58 विभागों से उलझना होगा| उद्योग विभाग और स्थानिय कमेटी से लाइसेंस,  अग्नि विभाग से आज्ञा, सेल टैक्स से प्रमाण पत्र और प्रदूषण विभाग से अन्नापत्ति पत्र लेना होगा, तो केन्द्रीय आबकारी विभाग को जानकारी मुह्हैया करानी होगी, और वो सभ भी एक के बाद एक| पहले बिजली का कन्नेक्शन मिलेगा तब पोल्यूशन से अन्नापत्ति पत्र| इतने सारे विभाग और उनके इतने सारे नियम, और कोई ऐसा विभाग नहीं जो पैसे ना खाता हो, लेकिन यदि भ्रष्टाचार समाप्त हो गया तो इन सभी विभागों को अपने आप ही समझ आ जायेगा कि कितने नियम फालतू हैं और कितने काम के, क्योंकि अब किसी भी नियम से पैसे तो मिलेंगे नहीं| भ्रष्टाचार पर जानकारी मुह्हैया कराने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था "Transparency International" के अनुसार भारत में हर वर्ष 2200 हज़ार करोड़ रुपये कि रिश्वत तो केवल ट्रक वाले ही दे देते हैं| अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था (IFC) के अनुसार अपना व्यापार करने के लिए अनुकूल 184 देशों की श्रेणी में भारत का 135 वाँ नंबर है|  अगर विदेशी बैंकों में जमा भारत के काले धन को पूरी ईमानदारी से भारत में लाया जाये तो 30 वर्षो तक यहाँ पर कोई टैक्स लगाने की ज़रूरत नहीं है| इस सब के बावजूद 2010 की जानकारी के अनुसार भारत की GDP ग्रोथ पूरे विश्व में पांचवें नंबर पर है, ज़रा सोचिये कि अगर भारत में से भ्रष्टाचार हटा लिया जाये, तो गरीबी कितने दिन तक यहाँ टिक सकेगी? 

जैसे कि ऊपर बताया, जन लोकपाल बिल पास होने पर सभी सरकारी विभागों को एक "सिटिज़न चार्टर" बनाना होगा| डिपार्टमेंट के हर पब्लिक डीलिंग ऑफिस में "सिटिज़न चार्टर" का बोर्ड लगा होगा और उनकी वेबसाइट पर जनकारी होगी जिसमे लिखा होगा कि अर्जी देने के कितने दिन में आपका काम हो जायेगा| अब आप राशन कार्ड, पासपोर्ट, आदि कि अर्जी दीजिये और काम पूरा करने की जल्दी सरकारी अफसरों को होगी, क्योंकि समय पर काम पूरा न होने पर उनकी तनख्वा मे से पैसे कटेंगे, और आपको हुई परेशानी के हर्जाने के तौर पर आपको मिलेंगे| अब आपको बिजली का कनेक्शन लगवाना है, या पानी का बिल ठीक कराना है तो बस अर्जी दीजिये| मकान बनाना है तो नक़्शे की बस अर्जी दीजिये| गली की लाइट काम नहीं करती, सरकारी सफाई कर्मचारी सफाई करने नहीं आता, एक गली बार-२ बनती है और आपकी गली नहीं बनती, महंगाई बढ़ाने को कोई जमाखोरी करे, पार्क में सरकारी माली काम नहीं करता या सरकारी अध्यापक पढ़ाता  नहीं, तो बस सम्बन्धित विभाग में एक अर्जी दे दीजिये| बैंक वाला लोन पास करने को रिश्वत मांगे या राशन वाला आपका राशन खा जाये तो इसकी जानकारी भर लोकपाल/लोकायुक्त को दे दी दीजिये| इनाम तो मिलेगा ही और अगर इस तरह की जानकारी देने से आपको कोई जान या माल का खतरा पैदा होता है, तो लोकपाल आपको तुरंत और पूरी सुरक्षा भी मुह्हैया करवाएगा|  

राजीव गाँधी ने एक बार कहा था कि सरकारी योजनाओं का 15% पैसा ही ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँचता है| सरकार ऋण तो माफ़ करती है आत्महत्या कर रहे किसानो के लिए, पर हजारों करोड़ रूपये का फायदा पहुँचता है उन कृषि से उकताए "किसानों" को जिनकी "महंगी" ज़मीने है दिल्ली में| गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए सरकार स्वाथ्य बीमा करवाए तो निजी हस्पताल गरीबों का ऑपरेशन कर के ही छोड़ते हैं| सस्ती दरों का राशन PDS के अफसरों के घर भरता है| उर्वरक पर दी जाने वाली सब्सिडी किसानो से ज्यादा कंपनियों को फायदा पहुंचती है| लेकिन इस बात में भी कोई शक नहीं कि सरकारी योजनाओं में समय के साथ-२ भ्रष्टाचार भी कम हुआ है, गरीबो तक पहुँचने वाला पैसा अब 15% से बढ कर 30% हो गया होगा| राजीव गाँधी के समय से राहुल गाँधी के समय तक अगर सरकारी योजनाएं 50% गरीबों तक भी पहुँचने लगे, तो क्या?  जरा सोचिये, नरेगा का पूरा पैसा अगर जनहित में इस्तेमाल हो तो कोई ग्रामीण बेरोजगार रहेगा क्या? यह सिर्फ जन लोकपाल व्यवस्था से ही संभव है| UID स्कीम सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार कम करने की बहुत अच्छी तकनीकी स्कीम है, पर उसके भी जो छोटे-२ छिद्रों होंगे उनको भी जन लोकपाल व्यवस्था से भरा जा सकता है| 

भ्रष्टाचार बंद होने से इतने लाखों करोड़ रूपये की जो लूट बचेगी उससे क्या क्या नहीं हो सकता| सेना के वैज्ञानिक ढंग से काम कर के अच्छी-२ तकनीक विकसित कर सकते है| हर गाँव, हर कसबे और हर शहर में सड़क, बिजली, पानी, पढाई और स्वास्थ्य की व्यवस्था हो सकती है| सड़कें दुगनी चोडी हो सकती हैं| और ज्यादा फ्लाई ओवर बन सकते हैं| ज्यादा स्कूल और कॉलेज बन सकते हैं| ज्यादा हस्पताल बन सकते है| ज्यादा लोगों को रोज़गार मिल सकता है| समय पर न्याय देनी वाली अदालतें बन सकती हैं| आतंकवाद से पूरी सुरक्षा हो सकती है| बाढ़ और सूखे से निजात पाने वाली देश की सभी नदियों को जोड़ने की योजना कार्यान्वित हो सकती है| और शायद देश सोने की चिड़िया फिर से बनने की तरफ अग्रसर हो सकता है| 

यदि भ्रष्टाचार नहीं रहा तो अमीर और गरीब का सामाजिक फर्क भी नहीं रहेगा| अमीर का पैसा सिर्फ बाजारी सामान खरीद सकेगा, क्योंकि रिश्वत नहीं चलेगी, कहीं भी नहीं चलेगी| पूलिस थाने, कचहरी, सरकारी दफ्तरों से लेकर सरकारी अस्पतालों, राशन कार्ड और पासपोर्ट तक के लिए सभी एक ही लाइन में होंगे, सभी के लिए एक ही व्यवस्था होगी, सभी एक ही स्तर पर होंगे| तब पूलिस वाले का भी बिना हेलमेट के चालान होगा, रिश्वतखोर जज पर भी मुकद्दमा चलेगा, आम जनता भी भ्रष्ट नेता की शिकायत कर सकेगी और सरकारी अफसर हमारे वास्तविक सेवक होंगे| जब भारत में भ्रष्टाचार नहीं रहेगा तब मिलेगी हमें अपनी ज़िन्दगी जीने की आज़ादी, सामाजिक और आर्थिक आज़ादी, पूरी आज़ादी|